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पीएम-वीबीआरवाई योजना से 81 प्रतिशत नियोक्ता परिचित, बड़े संगठनों में जानकारी सबसे ज्यादा : रिपोर्ट 

Source : business.khaskhabar.com | Jan 20, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 81 of employers aware of pm vbry scheme awareness highest in large organizations report 785464नई दिल्ली । भारत में करीब 81 प्रतिशत नियोक्ता या कंपनियां प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) के बारे में जानती हैं। बड़े संगठनों में इस योजना की जानकारी सबसे ज्यादा है, जहां 83 प्रतिशत नियोक्ता इससे परिचित हैं। मंगलवार को जारी स्टाफिंग ग्रुप टीमलीज सर्विसेज की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई। 
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्टार्ट-अप और छोटे कारोबार इस योजना से सबसे ज्यादा फायदा उठा सकते हैं, लेकिन उनमें से केवल 5.4 प्रतिशत नियोक्ताओं को ही इसके बारे में जानकारी है। यह योजना सरकार की ओर से नौकरी बढ़ाने के लिए शुरू की गई है।
पीएम-वीबीआरवाई योजना के तहत सरकार औपचारिक कार्यबल (फॉर्मल वर्कफोर्स) में पहली बार नौकरी पाने वाले और ईपीएफओ में नए रजिस्टर कर्मचारियों को सीधे 15,000 रुपए तक का प्रोत्साहन देती है। यह राशि दो हिस्सों में दी जाती है।
इसके अलावा, अगर कोई कंपनी नया कर्मचारी रखती है और वह कर्मचारी कम से कम छह महीने तक बना रहता है, तो कंपनी को हर कर्मचारी पर 3,000 रुपए प्रति माह तक का प्रोत्साहन दिया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के दूसरे हिस्से में 56 प्रतिशत कंपनियां अपनी वर्कफोर्स बढ़ाने की योजना बना रही हैं, लेकिन इनमें से भी केवल 60.4 प्रतिशत ही इस योजना से परिचित हैं।
कुछ सेक्टरों में इस योजना की जानकारी ज्यादा देखने को मिली है। एफएमसीजी सेक्टर में 72.2 प्रतिशत और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 64.3 प्रतिशत नियोक्ता इस योजना को जानते हैं।
वहीं, शिक्षा सेवाओं जैसे सर्विस सेक्टर में इसकी जानकारी काफी कम, सिर्फ 33.3 प्रतिशत पाई गई है। इससे साफ है कि सरकार को अलग-अलग सेक्टरों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
टीमलीज सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बालासुब्रमणियन ए. ने कहा कि करीब 19 प्रतिशत नियोक्ता अब भी इस योजना से पूरी तरह अनजान हैं। अगर इस जानकारी के अंतर को दूर किया जाए, तो कंपनियां अपनी क्षमता बढ़ा सकती हैं, कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रख सकती हैं और भविष्य के लिए मजबूत वर्कफोर्स तैयार कर सकती हैं।
इस सर्वे में 23 उद्योगों के 1,200 से ज्यादा नियोक्ताओं से बातचीत की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि केवल योजना के बारे में जानकारी होना ही काफी नहीं है, क्योंकि कई नियोक्ता जानते हुए भी इसमें भाग लेने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जो नियोक्ता इस योजना से परिचित हैं, वे इसमें शामिल होने का फैसला तुरंत मिलने वाले पैसे के बजाय लंबे समय की वर्कफोर्स योजना को देखकर करते हैं। सबसे बड़ा कारण स्किल डेवलपमेंट को माना गया, जिसे 51.8 प्रतिशत नियोक्ताओं ने अहम बताया। वहीं, सीधे नौकरी पर मिलने वाले प्रोत्साहन को केवल 18.6 प्रतिशत नियोक्ताओं ने प्राथमिकता दी।
इसके अलावा, 39.7 प्रतिशत नियोक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने वाले प्रोत्साहन बेहतर कामकाज के लिए जरूरी हैं। वहीं, 29.9 प्रतिशत नियोक्ताओं ने वर्कफोर्स को व्यवस्थित करने, नियमों का पालन करने और औपचारिक वित्तीय सुविधाओं तक बेहतर पहुंच को अहम माना।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कंपनियों के कंपनसेशन और बेनिफिट्स टीम में इस योजना की जानकारी सबसे ज्यादा यानी 71.7 प्रतिशत है। इसके बाद टैलेंट एक्विजिशन प्रोफेशनल्स में 68.4 प्रतिशत जागरूकता देखी गई। वहीं, एचआर विशेषज्ञों में यह जानकारी कम, सिर्फ 44.4 प्रतिशत पाई गई।
--आईएएनएस 

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