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मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने वित्त मंत्री से की यूपीआई पेमेंट शुल्क से पूरी तरह छूट की मांग

Source : business.khaskhabar.com | Sep 22, 2026 | businesskhaskhabar.com Gadget News Rss Feeds
 mobile retailers association demands full exemption from upi payment charges from finance minister 846610नई दिल्ली । ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से छोटे और मध्यम मोबाइल फोन विक्रेताओं को प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) या यूपीआई ट्रांजैक्शन शुल्क से पूरी तरह छूट देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मोबाइल रिटेलर्स पहले से ही बेहद सीमित मुनाफे पर कारोबार कर रहे हैं और अतिरिक्त शुल्क उनके लिए बड़ा बोझ साबित हो सकता है। 
वित्त मंत्री को लिखे पत्र में एआईएमआरए ने कहा कि वह देशभर के 1.50 लाख से अधिक छोटे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर्स का प्रतिनिधित्व करता है।
एसोसिएशन के अनुसार, यदि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू किया जाता है, तो इससे खुदरा विक्रेताओं की लागत सीधे बढ़ जाएगी। ऐसे समय में यह फैसला और अधिक दबाव पैदा करेगा, जब मोबाइल रिटेल कारोबार पहले से कमजोर बिक्री और बढ़ती परिचालन लागतों का सामना कर रहा है।
एआईएमआरए ने कहा, "मुख्यधारा के मोबाइल रिटेलर्स का शुद्ध लाभ मार्जिन आमतौर पर केवल 0.75 प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत के बीच होता है। यदि यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू किया जाता है, तो यह सीधे उनके अस्तित्व से जुड़े मुनाफे को कम कर देगा।"
संगठन का कहना है कि यूपीआई अब खुदरा कारोबार में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में शुल्क लागू होने का प्रभाव सीधे कारोबार की लाभप्रदता पर पड़ेगा।
एसोसिएशन के अनुसार, यदि कोई रिटेलर हर महीने 10 लाख रुपए से 40 लाख रुपए तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन करता है, तो 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू होने पर उसे 4,000 रुपए से 16,000 रुपए तक की अतिरिक्त मासिक लागत उठानी पड़ सकती है।
एआईएमआरए ने स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का मुद्दा भी उठाया। संगठन के मुताबिक, नवंबर 2025 के बाद से कंपोनेंट्स और मेमोरी की लागत बढ़ने से हैंडसेट की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है।
एसोसिएशन का दावा है कि वर्ष 2025 में लगभग 10,000 रुपए में उपलब्ध एंट्री-लेवल स्मार्टफोन की कीमत अब बढ़कर 17,000 रुपए के आसपास पहुंच गई है और दिसंबर 2026 तक यह 20,000 रुपए तक जा सकती है।
एआईएमआरए ने कहा कि बढ़ती कीमतों और मांग में नरमी के कारण खुदरा विक्रेताओं का कारोबार पहले ही प्रभावित हुआ है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क छोटे दुकानदारों पर और अधिक वित्तीय दबाव डाल सकता है।
रिटेलर्स संगठन ने सरकार से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहला, छोटे और मध्यम रिटेलर्स के लिए यूपीआई एमडीआर से पूर्ण छूट। दूसरा, कम लागत वाले डिजिटल भुगतान तंत्र की निरंतर उपलब्धता। तीसरा, किसी भी नए शुल्क ढांचे को लागू करने से पहले व्यापार संगठनों से परामर्श और चौथा, खुदरा क्षेत्र के लिए अतिरिक्त नीतिगत समर्थन।
एसोसिएशन का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की नीति के तहत छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त शुल्क के बोझ से बचाना जरूरी है, ताकि डिजिटल ट्रांजैक्शन की वृद्धि और खुदरा व्यापार दोनों को समान रूप से समर्थन मिल सके।
--आईएएनएस
 

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