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यूपीआई के 10 साल: भारत ने वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट में हासिल की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी

Source : business.khaskhabar.com | Apr 11, 2026 | businesskhaskhabar.com Gadget News Rss Feeds
 10 years of upi india secures 49 share in global real time digital payments 805352नई दिल्ली । भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को शनिवार को 10 साल पूरे हो गए हैं और इस दौरान भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। सरकार के अनुसार, आज भारत वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जो देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल ताकत को दर्शाता है। 
जनवरी 2026 में ही यूपीआई के जरिए 21.70 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपए रही। भारत में कुल रिटेल डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो इसकी लोकप्रियता और व्यापक उपयोग को दिखाती है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है। खास बात यह है कि इसे 10 साल से भी कम समय में विकसित किया गया, और इस दौरान इसमें 12,000 गुना से ज्यादा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और 4,000 गुना से अधिक वैल्यू की वृद्धि दर्ज की गई है।
यूपीआई की असली ताकत सिर्फ इसके आंकड़ों में नहीं, बल्कि इसके व्यापक उपयोग में है। आज यह सिस्टम शहरों से लेकर गांवों तक, ऑटो रिक्शा चालकों से लेकर सड़क किनारे दुकानदारों और मंडियों तक पहुंच चुका है।
एक साधारण स्मार्टफोन की मदद से कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी कोने में तुरंत पैसे भेज सकता है, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है।
भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम अब दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुका है। आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं ने इसकी व्यापकता, दक्षता और समावेशी मॉडल की सराहना की है।
यूपीआई का दायरा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रहा है। यह सिस्टम संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे देशों तक पहुंच चुका है, जिससे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन और रेमिटेंस आसान हो गए हैं।
सरकार के अनुसार, यूपीआई अब सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं रहा, बल्कि यह एक व्यापक फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है। यूपीआई लाइट छोटे और तेज भुगतान को आसान बना रहा है, वहीं यूपीआई ऑटोपे के जरिए बिजली बिल और सब्सक्रिप्शन जैसे नियमित भुगतान ऑटोमैटिक हो गए हैं।
इसके अलावा, यूपीआई के जरिए क्रेडिट सुविधाएं भी बढ़ी हैं, जहां एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियां प्री-अप्रूव्ड लोन, आसान रीपेमेंट और कस्टमाइज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स उपलब्ध करा रही हैं।
--आईएएनएस
 

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