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हरी इलायची की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल: सप्लाई संकट और अंतरराष्ट्रीय मांग से भाव ₹3800 के पार

Source : business.khaskhabar.com | Jun 22, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 green cardamom prices surge to record highs supply crunch and international demand push prices past ₹3800 823219
बिजनेस डेस्क। जयपुर 

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चौतरफा मांग बढ़ने और सीमित आपूर्ति के चलते हरी इलायची (छोटी इलायची) के दामों में आग लगी हुई है। जयपुर थोक बाजार में महज एक सप्ताह के भीतर इसके भाव ₹300 प्रति किलोग्राम तक बढ़ गए हैं। इसके साथ ही प्रीमियम क्वालिटी की 'जगरतन' ब्रांड हरी इलायची (साइज 8 से 8.50 एमएम) की कीमतें सोमवार को ₹3800 प्रति किलो के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गईं। 

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी कीमतों में नरमी के आसार नहीं हैं। भारतीय हरी इलायची अपनी लाजवाब सुगंध और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस समय अमेरिका, यूरोप और खाड़ी (मिडिल ईस्ट) देशों से भारतीय इलायची की भारी मांग निकल रही है। 

आंकड़ों के मुताबिक, चालू वर्ष में इलायची का निर्यात पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा दर्ज किया गया है। इसके अलावा, हाल ही में अमेरिकी सरकार द्वारा भारतीय मसालों और इलायची पर से अतिरिक्त आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) हटाने का फैसला बेहद टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। इस नीतिगत राहत के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय इलायची अन्य देशों के मुकाबले कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक हो गई है, जिससे विदेशी खरीदार तेजी से भारत का रुख कर रहे हैं। 

घरेलू बाजार का गणित और सप्लाई संकटः 

भारतीय मंडियों में इस समय पुराना स्टॉक लगातार कम हो रहा है, जबकि स्टॉकिस्ट भविष्य में और तेजी की उम्मीद में जमकर लिवाली (खरीदारी) कर रहे हैं। देश में नई फसल की आवक शुरू होने में अभी लगभग दो महीने का समय बाकी है। ऐसे में बाजार में माल की किल्लत साफ देखी जा रही है। भारत में छोटी इलायची का मुख्य उत्पादन दक्षिणी राज्यों—केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में होता है। इसमें भी कुल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा केरल और तमिलनाडु के पहाड़ी इलाकों (वेस्टर्न घाट) से आता है। 

इलायची की खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश, सही तापमान और कीट-रोग प्रबंधन पर निर्भर करती है। पिछले साल के मुकाबले इस बार कीमतें काफी मजबूत स्थिति में हैं, और जब तक नई फसल मंडियों में नहीं आ जाती, तब तक बाजार में यह तेजी बरकरार रहने की पूरी संभावना है।

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