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ऑफिस आने-जाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं दोपहिया वाहन, कर्मचारी औसतन 785 रुपए महीना करते हैं खर्च: एनएसओ सर्वे

Source : business.khaskhabar.com | Oct 06, 2026 | businesskhaskhabar.com Automobile News Rss Feeds
 two wheelers are the most commonly used mode of transportation for commuting to and from work with employees spending an average of ₹785 per month nso survey 850746नई दिल्ली । राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में निश्चित कार्यस्थलों पर आने-जाने के लिए दोपहिया वाहन सबसे प्रमुख परिवहन साधन हैं। देश के 42.6 प्रतिशत कर्मचारी अपने कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए टू-व्हीलर का उपयोग करते हैं। सर्वे में यह भी सामने आया कि एक कर्मचारी कार्यस्थल तक आने-जाने पर औसतन 785 रुपए प्रति माह खर्च करता है। 
सर्वेक्षण के अनुसार, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच यात्रा खर्च में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। शहरी कर्मचारियों का औसत मासिक आवागमन खर्च 1,044 रुपए है, जबकि ग्रामीण कर्मचारियों का औसत खर्च 612 रुपए प्रति माह है।
सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि भारत में अधिकांश लोगों की यात्रा अवधि अपेक्षाकृत कम है। करीब 83.4 प्रतिशत कर्मचारी अपने निश्चित कार्यस्थल तक 30 मिनट से कम समय में पहुंच जाते हैं। वहीं 87.6 प्रतिशत छात्र अपने शैक्षणिक संस्थानों तक आधे घंटे के भीतर पहुंच जाते हैं।
हालांकि दूरी के लिहाज से देखें तो 57.6 प्रतिशत कर्मचारी काम पर पहुंचने के लिए 1 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करते हैं। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के कर्मचारियों में आधे से ज्यादा लोग प्रतिदिन कार्य से संबंधित यात्रा करते हैं। यह अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों में 54.5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 64.1 प्रतिशत है।
राज्यवार आंकड़ों में राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में औसत यात्रा समय लगभग 20 से 23 मिनट पाया गया। दूसरी ओर दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में यात्रा समय अपेक्षाकृत अधिक दर्ज किया गया।
पुरुष और महिला कर्मचारियों के यात्रा पैटर्न में भी अंतर देखा गया। देशभर में 61.9 प्रतिशत पुरुष कर्मचारी प्रतिदिन काम के लिए नियमित यात्रा करते हैं, जबकि महिलाओं का यह अनुपात 41.9 प्रतिशत है।
शहरी परिवहन के संदर्भ में मेट्रो, मोनोरेल, उपनगरीय रेल और ट्राम का योगदान राष्ट्रीय स्तर पर 5 प्रतिशत है। हालांकि कुछ राज्यों और शहरों में इनका उपयोग काफी अधिक है। महाराष्ट्र में 20.7 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 16.5 प्रतिशत और दिल्ली में 14.4 प्रतिशत कर्मचारी इन सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों का उपयोग करते हैं।
छात्रों के संदर्भ में सर्वेक्षण बताता है कि 6 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग दो-तिहाई छात्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन कम से कम 1 किलोमीटर की यात्रा करते हैं। यह अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों में 65.6 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 68.1 प्रतिशत है।
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों, विशेष रूप से असम और आसपास के राज्यों में छात्रों और कर्मचारियों का औसत यात्रा समय अपेक्षाकृत कम, लगभग 15 से 19 मिनट पाया गया।
15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के छात्रों में नियमित यात्रा का स्तर सबसे अधिक है। ग्रामीण भारत में इस आयु वर्ग के 79.1 प्रतिशत और शहरी भारत में 73.3 प्रतिशत छात्र प्रतिदिन शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने के लिए नियमित यात्रा करते हैं।
यातायात साधनों की बात करें तो छात्रों के बीच ऑटो-रिक्शा की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। कुल छात्रों में 10.5 प्रतिशत ऑटो का उपयोग करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 14.4 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। वहीं 6.7 प्रतिशत छात्र दोपहिया वाहनों से सफर करते हैं, जो शहरी क्षेत्रों में बढ़कर 11.5 प्रतिशत हो जाता है।
--आईएएनएस
 

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