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जीएसटी परिषद 8 अक्टूबर की बैठक में कारोबार में आसानी और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने पर चर्चा होने की संभावना

Source : business.khaskhabar.com | Oct 06, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 discussions on promoting ease of doing business and e commerce are likely to take place during the gst council meeting on october 8 850964
बिजनेस डेस्क। नई दिल्ली 

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 8 अक्टूबर को होने वाली बैठक में अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के अगले चरण के महत्वपूर्ण सुधारों पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इन प्रस्तावों का उद्देश्य कर अनुपालन को सरल बनाना, कारोबार सुगमता बढ़ाना, रिफंड प्रक्रिया को तेज करना और टैक्स प्रशासन को अधिक भरोसा-आधारित बनाना है। प्रस्तावित सुधारों का फोकस मुख्य रूप से पांच प्रमुख क्षेत्रों पर है, जिनमें प्रक्रियागत सुधार, संरचनात्मक सुधार, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ई-कॉमर्स और सेवा निर्यात शामिल हैं। 

रिफंड प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाने के लिए प्रस्ताव है कि रिफंड आवेदन की प्राप्ति की पुष्टि 10 दिनों के भीतर कर दी जाए। साथ ही, कस्टम्स और बैंकिंग सिस्टम से प्राप्त स्वचालित डेटा के आधार पर जोखिम मूल्यांकन के बाद 90 प्रतिशत राशि शीघ्र जारी की जा सके। इससे निर्यातकों और कारोबारियों की कार्यशील पूंजी पर दबाव कम हो सकता है। 

विवादों और मुकदमेबाजी से जुड़े मामलों में भी सुधार का प्रस्ताव है, जिसके तहत नोटिस, सुनवाई और आदेशों के लिए एक समान मानक अपनाने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही एक निश्चित सीमा से नीचे के मामलों में नोटिस जारी न करने का प्रावधान भी लाया जा सकता है। रिटर्न फाइलिंग प्रणाली को भी अधिक सुव्यवस्थित बनाने की योजना है। 

प्रस्तावित व्यवस्था में किए गए संशोधनों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और खरीदार की लेजर में संबंधित बदलाव स्वतः अपडेट होंगे। इस प्रक्रिया को इनवॉइस मैचिंग कहा जाता है, जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की वैधता शुरुआती स्तर पर ही सुनिश्चित हो सकेगी और बड़ी संख्या में विसंगति नोटिसों से बचा जा सकेगा। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। 

वर्तमान में लगभग 61 प्रतिशत करदाताओं को बिना किसी अधिकारी के हस्तक्षेप के तीन कार्यदिवस के भीतर जीएसटी पंजीकरण मिल जाता है। शेष मामलों में भी अनावश्यक प्रश्नों और अस्वीकृतियों को कम करने के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। सरकार कारोबार बंद करने की प्रक्रिया को भी व्यवसाय शुरू करने जितना आसान बनाना चाहती है। 

प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी व्यवसाय का पंजीकरण केवल प्रक्रियागत कारणों से निलंबित हुआ है तो कमी दूर होने पर उसे स्वतः बहाल किया जा सकेगा। इसके अलावा केवल उपभोक्ताओं को सामान बेचने वाले छोटे करदाताओं को मासिक के बजाय साल में एक बार रिटर्न दाखिल करने की सुविधा मिल सकती है। 

संरचनात्मक सुधारों के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के नियमों को भी अधिक व्यवसाय-अनुकूल बनाने का प्रस्ताव है। यदि खरीदार के पास वैध चालान है, उसने सामान प्राप्त कर लिया है और आपूर्तिकर्ता को पूरा भुगतान कर दिया है, तो उसका टैक्स क्रेडिट सुरक्षित रहना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि आपूर्ति शृंखला में ऊपर किसी अन्य पक्ष ने टैक्स जमा किया या नहीं। इसके अलावा, कई सामान्य कारोबारी खर्चों को, जो फिलहाल आईटीसी शृंखला से बाहर हैं, पुनः शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। 

इससे कंपनियों की लागत कम हो सकती है और दोहरे कराधान जैसी स्थितियों में कमी आ सकती है। सेवा निर्यात क्षेत्र के लिए भी कई राहत प्रस्तावित हैं। यदि कोई भारतीय कंपनी विदेश स्थित अपनी शाखा के माध्यम से विदेशी ग्राहक को बिल जारी करती है, तो उसके निर्यात दर्जे पर असर नहीं पड़ेगा। इसी तरह भारत में किए गए टेस्टिंग, रिपेयर, सर्टिफिकेशन और रिसर्च कार्य को भी निर्यात माना जा सकेगा, भले ही संबंधित वस्तु देश से बाहर न गई हो। 

ई-कॉमर्स को छोटे कारोबारियों के लिए अधिक सरल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव हैं। वर्तमान व्यवस्था में विक्रेता को हर उस राज्य में पंजीकृत कार्यालय दिखाना पड़ता है जहां वह बिक्री करता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक बार गृह राज्य में सत्यापन होने के बाद देशभर में बिक्री की अनुमति आसान हो सकती है। इससे छोटे विक्रेताओं को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। 

बैठक में ट्रस्ट-आधारित कर प्रशासन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हो सकती है। प्रस्ताव है कि कई जीएसटी उल्लंघनों को आपराधिक प्रावधानों से बाहर लाया जाए। इस मॉडल में कर वसूली, ब्याज और जुर्माना जैसे उपायों पर जोर होगा, जबकि गिरफ्तारी जैसे कठोर प्रावधानों का उपयोग केवल गंभीर धोखाधड़ी मामलों तक सीमित हो सकता है। 

प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य ऐसा कर ढांचा तैयार करना है, जिसमें अधिकांश कार्य डेटा और तकनीक-आधारित स्वचालन से पूरे हों और अधिकारियों की भूमिका मुख्य रूप से विवेकपूर्ण निर्णय वाले मामलों तक सीमित रहे। -आईएएनएस

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