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ग्रीन एनर्जी स्कीम 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में 'बड़ा कदम': पीएम मोदी

Source : business.khaskhabar.com | Oct 01, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 green energy scheme a big step towards achieving the target of 900 gigawatts of non fossil fuel based energy capacity by 2035 pm modi 849361नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (जीईसी-III) योजना को कैबिनेट की मंजूरी देश को वर्ष 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्वच्छ ऊर्जा, मजबूत बिजली ग्रिड और रोजगार सृजन को नई गति देगा। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा, "स्वच्छ बिजली, मजबूत ग्रिड और अधिक अवसर"। उन्होंने बताया कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III के तहत 135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी सुनिश्चित की जाएगी, 50 गीगावाट-घंटे (जीडब्ल्यूएच) बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित की जाएगी और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में बिजली ग्रिड को मजबूत बनाया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह योजना विनिर्माण, निर्माण और ऊर्जा भंडारण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को और तेज करेगी।
इसके साथ ही एक अन्य एक्स पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, देशभर के किसानों के हितों की रक्षा के साथ ही उनकी आय में बढ़ोतरी के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी दिशा में हमारी सरकार ने 2027-28 के मार्केटिंग सीजन के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी में वृद्धि को मंजूरी दी है। इससे देश के करोड़ों किसान भाई-बहनों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना सुनिश्चित होगा।"
दरअसल, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को जीईसी-III योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी प्रसारण और एकीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करना है।
भारत का ऊर्जा क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार कर रहा है। जुलाई 2026 तक देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 552 गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि वर्ष 2014 में यह लगभग 249 गीगावाट थी।
इसमें 300.50 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता शामिल है, जो देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाती है। भारत वर्तमान में नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जुलाई 2026 तक देश की स्थापित सौर क्षमता 164.59 गीगावाट तक पहुंच गई, जो वर्ष 2014 में केवल 2.8 गीगावाट थी। सौर ऊर्जा अब भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सबसे बड़ा घटक बन चुकी है।
वर्ष 2025 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा वृद्धि बाजार बना। इस दौरान देश ने 37 गीगावाट से अधिक नई सौर क्षमता जोड़ी, जबकि अमेरिका ने लगभग 34 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना की कुल लागत 1.86 लाख करोड़ रुपए से अधिक होगी, जिसमें 1.36 लाख करोड़ रुपए राज्यों के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित करने पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 50,000 करोड़ रुपए की लागत से 50 जीडब्ल्यूएच बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) स्थापित की जाएगी।
योजना के तहत बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियां नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों या अन्य महत्वपूर्ण ग्रिड स्थलों पर स्थापित की जाएंगी। इनका उद्देश्य सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों, ग्रिड भीड़भाड़ और पीक आवर्स की मांग को बेहतर तरीके से संभालना है।
सरकार ने इस योजना के लिए 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया है।
--आईएएनएस
 

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