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ज्वेलरी क्षेत्र को एक संगठित पेशेवर उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को जोड़ना बेहद आवश्यक: उद्योग जगत

Source : business.khaskhabar.com | Oct 01, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 integrating education and skills training is crucial to developing the jewelry sector as an organized professional industry industry leaders 849360कोलकाता । ज्वेलरी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने बुधवार को कहा कि पारंपरिक कारीगरी को बचाने और नई पीढ़ी को इस क्षेत्र से जोड़ने के लिए कौशल-आधारित शिक्षा को औपचारिक मान्यता देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कारीगर इस उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण नींव हैं। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि ज्वेलरी क्षेत्र को एक संगठित पेशेवर उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को जोड़ना बेहद आवश्यक है। 
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की नेशनल एक्सपर्ट कमेटी ऑन ज्वेलरी एंड लाइफस्टाइल के अध्यक्ष और नेमिचंद बामलवा एंड संस के निदेशक विनोद बामलवा ने कहा कि ज्वेलरी उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नई पीढ़ी के कारीगर इस क्षेत्र में आने से बच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अब तक इस काम को औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा के रूप में पर्याप्त मान्यता नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि यदि ज्वेलरी निर्माण से जुड़े कौशल को शैक्षणिक डिग्री और प्रमाणपत्रों से जोड़ा जाए, तो युवाओं का आकर्षण इस क्षेत्र की ओर बढ़ेगा।
विनोद बामलवा ने आगे कहा कि सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है कि कक्षा 8, 9 और 10 से ही छात्रों को उद्योग के सहयोग से ज्वेलरी निर्माण और संबंधित तकनीकी विषयों की शिक्षा दी जा सके।
उन्होंने कहा, "उद्योग जगत ने इस पहल को पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया है। यदि कौशल प्रशिक्षण को डिग्री या औपचारिक मान्यता से जोड़ा जाता है, तो कारीगरों की अगली पीढ़ी तैयार करने में मदद मिलेगी और पारंपरिक कला को भी संरक्षित किया जा सकेगा।"
विनोद बामलवा ने आईएएनएस से कहा कि संबंधित मंत्री ने उद्योग प्रतिनिधियों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे बिना किसी चिंता के काम करें और यदि किसी प्रकार की बाधा आती है तो सरकार उसका समाधान करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि कौशल-आधारित प्रशिक्षण को भी उच्च शिक्षा की तरह सम्मान और पहचान मिले। इसके लिए उद्योग जगत का सहयोग आवश्यक है और इस दिशा में सकारात्मक पहल शुरू हो चुकी है।
वहीं, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) की नेशनल एक्सपर्ट कमेटी ऑन ज्वेलरी एंड लाइफस्टाइल के को-चेयरमैन तथा सेनको गोल्ड एंड डायमंड्स के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ सुवंकर सेन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में कारीगरी की परंपरा कई दशकों पुरानी है और देश के प्रमुख ज्वेलरी केंद्रों जैसे मुंबई, सूरत और दक्षिण भारत में काम करने वाले बड़ी संख्या में कारीगर बंगाल से आते हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग और सरकार को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इस कला और कौशल को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए।
सुवंकर सेन ने आगे कहा, "ज्वेलरी उद्योग से जुड़ी पढ़ाई केवल आभूषण बनाने तक सीमित नहीं होती। इसमें धातु विज्ञान, मार्केटिंग, बिक्री तकनीक और उत्पाद प्रबंधन जैसे कई विषय शामिल होते हैं।"
उन्होंने कहा कि यदि स्कूल और कॉलेज स्तर पर इस तरह की शिक्षा को शामिल किया जाए, तो युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने कहा, "ज्वेलरी क्षेत्र को एक संगठित पेशेवर उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को जोड़ना बेहद आवश्यक है।"
सुवंकर सेन ने आगे आईएएनएस को बताया कि सरकार ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को ऐसा प्रशिक्षण और शिक्षा मिले, जिससे उनके करियर को वास्तविक लाभ पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि यदि उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थान मिलकर पाठ्यक्रम तैयार करें, तो स्किल डेवलपमेंट और नॉलेज ट्रेनिंग अधिक प्रभावी होगी। उनके अनुसार, सरकार की पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाना है।
--आईएएनएस

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