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भारत  ग्रीन हाइड्रोजन और पावर-टू-एक्स समाधानों के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है: टीएनओ के वरिष्ठ सलाहकार

Source : business.khaskhabar.com | Sep 26, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india has the potential to become a global hub for green hydrogen and power to x solutions tno senior advisor 847955नई दिल्ली । नीदरलैंड की एप्लाइड रिसर्च संस्था 'नीदरलैंड्स ऑर्गनाइजेशन फॉर एप्लाइड साइंटिफिक रिसर्च (टीएनओ) के वरिष्ठ सलाहकार और भारत प्रतिनिधि राजेश मेहता ने शुक्रवार को कहा कि भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन) ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र के विकास को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में, बल्कि हाइड्रोजन डेरिवेटिव्स और व्यापक पावर-टू-एक्स समाधानों के क्षेत्र में भी वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है। 
आईएएनएस से बातचीत में राजेश मेहता ने कहा कि भारत में ग्रीन हाइड्रोजन और पावर-टू-एक्स तकनीकों को लेकर तेजी से प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि पीईएम, अल्कलाइन और सॉलिड ऑक्साइड जैसी इलेक्ट्रोलाइजर तकनीकों के विस्तार और स्केल-अप के क्षेत्र में भारत महत्वपूर्ण सीख और अनुभव हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये विकास भारत को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना सकते हैं।
राजेश मेहता ने कहा, "भारत के ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका विकास एक सुविचारित नीति ढांचे के तहत हो रहा है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन ने पूरी वैल्यू चेन और औद्योगिक क्षेत्रों को दिशा देने का काम किया है।"
उन्होंने बताया कि रिफाइनरी क्षेत्र के लिए जारी किए गए टेंडर और नीति-आधारित पहलें यह दिखाती हैं कि भारत में केवल चर्चा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कदम भी उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, उद्योग जगत में इस क्षेत्र को लेकर उत्साह के साथ-साथ वास्तविक निवेश और परियोजनाएं भी देखने को मिल रही हैं।
राजेश मेहता ने आगे कहा, "भारत ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में निर्यात अवसरों पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। साथ ही जापान, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों के साथ बढ़ती साझेदारियां इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।"
उन्होंने आईएएनएस को बताया कि भारत अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के माध्यम से वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। यह सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक हस्तांतरण, अनुसंधान और औद्योगिक विकास तक भी फैला हुआ है।
टीएनओ के वरिष्ठ सलाहकार ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र के विस्तार में तकनीक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यूरोप के अनुसंधान संस्थान भारतीय उद्योगों, शीर्ष शोध संस्थानों और उभरती हुई हाइड्रोजन वैली परियोजनाओं के साथ मिलकर काम करने में रुचि रखते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से विकसित हो रहे हाइड्रोजन इकोसिस्टम के लिए अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहयोग महत्वपूर्ण होंगे। उनके अनुसार, यूरोपीय संस्थान अपनी विशेषज्ञता के जरिए भारत के साथ मिलकर नई तकनीकों के विकास और उनके बड़े पैमाने पर उपयोग में योगदान दे सकते हैं।
मेहता ने बताया कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन ने भारत को ऊर्जा परिवर्तन की वैश्विक दौड़ में मजबूत स्थिति दिलाई है। उन्होंने कहा कि नीति समर्थन, औद्योगिक निवेश, वैश्विक साझेदारियां और तकनीकी नवाचार के संयोजन से भारत ग्रीन हाइड्रोजन, हाइड्रोजन डेरिवेटिव्स और पावर-टू-एक्स समाधानों का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन सकता है।
--आईएएनएस
 

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