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वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर रहे भारतीय कंपनियों के नतीजे, बैंकिंग और मेटल सेक्टर ने दिखाई मजबूत बढ़त

Source : business.khaskhabar.com | Aug 07, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 indian corporate results beat expectations in q1 fy27 banking and metal sectors show strong growth 834661नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारतीय कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) में नुकसान के बावजूद बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं (बीएफएसआई), धातु (मेटल), प्रौद्योगिकी (आईटी) और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन ने कॉरपोरेट मुनाफे को सहारा दिया है। यह जानकारी ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (एमओएफएसएल) की एक रिपोर्ट में सामने आई है। 
रिपोर्ट के अनुसार, यदि तेल विपणन कंपनियों को आंकड़ों से अलग कर दिया जाए, तो कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव के बावजूद भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट में उन कंपनियों का विश्लेषण किया गया है, जो प्रमुख क्षेत्रों के कुल अनुमानित मुनाफे का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं। इसके आधार पर पहली तिमाही में कुल आय में 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बाजार को करीब 10 प्रतिशत गिरावट की आशंका थी। इस तरह नतीजे अनुमान से कहीं बेहतर रहे।
क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं (बीएफएसआई) ने सबसे महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस सेक्टर की आय में सालाना 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं मेटल सेक्टर में 53 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की आय 11 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल क्षेत्र की आय 7 प्रतिशत बढ़ी।
अब तक अपने नतीजे घोषित करने वाली 39 निफ्टी कंपनियों के मुनाफे में औसतन 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि बाजार को केवल 7 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद थी। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 49 प्रतिशत कंपनियां ब्रोकरेज फर्म के लाभ अनुमान से बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहीं। वहीं केवल 22 प्रतिशत कंपनियों के नतीजे अनुमान से कमजोर रहे, जो आय सीजन की व्यापक मजबूती को दर्शाता है।
हालांकि सभी क्षेत्रों का प्रदर्शन सकारात्मक नहीं रहा। तेल विपणन कंपनियां, सीमेंट, विमानन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र (हेल्थकेयर) इस तिमाही में आय पर सबसे अधिक दबाव डालने वाले सेक्टर रहे, जिसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कुछ क्षेत्रों में मांग संबंधी चुनौतियां प्रमुख कारण रहीं।
बड़ी कंपनियों (लार्ज-कैप) ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और उनकी आय में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर मिड-कैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसका मुख्य कारण तेल विपणन कंपनियों में हुआ नुकसान रहा।
हालांकि अगर ओएमसी को अलग कर दिया जाए, तो मिड-कैप कंपनियों की आय वास्तव में 25 प्रतिशत बढ़ी है। इससे स्पष्ट होता है कि अधिकांश मिड-कैप कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत रहा और गिरावट का प्रभाव मुख्य रूप से तेल क्षेत्र तक सीमित रहा।
स्मॉल-कैप कंपनियां इस तिमाही की सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरीं, जिनकी आय में 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और पिछले साल के तुलनात्मक आधार (बेस इफेक्ट) ने इस वृद्धि को समर्थन दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली तिमाही में आय अनुमानों में कटौती की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि आने वाले महीनों में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और आईपीओ तथा पूंजी जुटाने की बढ़ती गतिविधियां शेयर बाजार में अस्थिरता बनाए रख सकती हैं।  

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