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व्यापारी संगठनों ने नए यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को त्योहारी सीजन तक टालने की अपील की 

Source : business.khaskhabar.com | Oct 08, 2026 | businesskhaskhabar.com Gadget News Rss Feeds
 merchant organizations have appealed to the national payments corporation of india (npci) to postpone the implementation of the new upi mdr (merchant discount rate) framework until the festive season 851401नई दिल्ली । व्यापारी संगठनों ने भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए यूपीआई एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) फ्रेमवर्क को त्योहारी सीजन तक टालने की अपील की है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। 
सूत्रों के हवाले से एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में बताया गया कि व्यापारी संगठनों ने त्योहारी सीजन और अगले साल की शुरुआत तक प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को टालने की अपील की है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो त्योहारी सीजन में उनकी बिक्री पर असर हो सकता है। 
नए एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतानों के लिए चुनिंदा व्यापारी श्रेणियों पर 5 रुपए का एक समान शुल्क लागू होगा, जबकि 2,000 रुपए से अधिक के बड़े पर्सन टू मर्चेंट (पी2एम) भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए होगी।
एनपीसीआई का अनुमान है कि इन बदलावों का असर मर्चेंट ट्रांजैक्शन के सिर्फ 4 प्रतिशत हिस्से पर ही पड़ेगा, और 95 प्रतिशत से ज्यादा पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई पेमेंट एमडीआर फ्रेमवर्क के दायरे से बाहर रहेंगे। पीयर-टू-पीयर (पी2पी) मर्चेंट मॉडल का इस्तेमाल करने वाले छोटे मर्चेंट को जीरो एमडीआर की सुविधा मिलती रहेगी।
आम यूजर्स के लिए मुफ्त यूपीआई इस्तेमाल पर कोई मासिक कोटा या लिमिट तय नहीं की गई है, और वे तय मुफ्त फ्रेमवर्क के तहत ट्रांजैक्शन पर बिना किसी एमडीआर चार्ज के यूपीआई पेमेंट करना जारी रख सकते हैं।
नए फ्रेमवर्क में छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक खास फंड भी बनाया गया है, जिसके लिए कुल एमडीआर कलेक्शन का 5 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया है। एमडीआर से होने वाली कमाई को अलग-अलग कंपनियों के बीच बांटा जाएगा और इसका मकसद यूपीआई के विस्तार, साइबर सिक्योरिटी और इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
साथ ही, एनपीसीआई ने बैंकों को यह पक्का करने के लिए कहा है कि व्यापारी एमडीआर चार्ज का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
--आईएएनएस
 

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