businesskhaskhabar.com

Business News

Home >> Business

नए श्रम संहिताओं से आसान होगा अनुपालन, असंगठित और गिग वर्कर्स को मिलेगा व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवच 

Source : business.khaskhabar.com | Sep 25, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 new labour codes to simplify compliance unorganized and gig workers to gain comprehensive social security coverage 847650नई दिल्ली । श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा कि नए श्रम संहिता (लेबर कोड्स) भारत के श्रम ढांचे को नियंत्रण आधारित नियामकीय व्यवस्था से निकालकर सरकार, उद्योग और श्रमिकों के बीच सहयोग आधारित व्यवस्था की ओर ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि नए कोड्स से अनुपालन प्रक्रियाएं सरल होंगी, रोजगार अवसरों से जुड़ाव बेहतर होगा और सामाजिक सुरक्षा का दायरा पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक बनेगा। 
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव चंद्र भूषण कुमार ने कहा कि नए श्रम कोड्स के तहत विभिन्न श्रम कानूनों को समेकित कर व्यवस्था को सरल बनाया गया है। इसके साथ ही प्रावधानों की संख्या कम की गई है, अनुपालन प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया गया है, ई-पोर्टल विकसित किए गए हैं, रिटर्न दाखिल करने की व्यवस्था को एकरूप बनाया गया है और वेतन की परिभाषा को अधिक समान और स्पष्ट किया गया है।
उन्होंने कहा कि नया ढांचा गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा पहुंचाने के लिए अधिक मजबूत आधार प्रदान करता है। मंत्रालय डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को जोड़ने पर काम कर रहा है, ताकि लाभ से वंचित श्रमिकों की पहचान की जा सके और उनके लिए दीर्घकालिक एवं टिकाऊ श्रम मानक विकसित किए जा सकें।
कुमार ने बताया कि मंत्रालय देशभर के 316 औद्योगिक जिलों में जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। इसके साथ ही राज्यों के श्रम तंत्र और मास्टर ट्रेनर्स को भी नई व्यवस्था के लिए तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश राज्यों ने अपने नियमों का प्रारूप पहले ही प्रकाशित कर दिया है और मंत्रालय राज्य स्तर पर नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए लगातार काम कर रहा है। साथ ही फ्लोर वेज (न्यूनतम आधार वेतन) और अन्य कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों पर भी स्पष्टता लाने के प्रयास जारी हैं।
श्रम सचिव ने रोजगार, कौशल विकास और नौकरी के अवसरों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) और रोजगार एवं कौशल विकास से जुड़े डेटाबेस के एकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे नौकरी तलाशने वालों और नियोक्ताओं के बीच बेहतर संपर्क स्थापित हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के कई देशों की भारत के श्रम सुधार मॉडल में बढ़ती रुचि देश के लिए अवसर है और भारत आधुनिक श्रम पारिस्थितिकी तंत्र के एक सफल उदाहरण के रूप में उभर सकता है।
पीएचडीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और महासचिव डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि यदि भारत को विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है, तो भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत कार्यस्थलों और नए श्रम कोड्स के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा।
उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि श्रम कानूनों का ढांचा विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र के लिए सरल और आसानी से समझ आने वाला होना चाहिए। भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले एमएसएमई को अत्यधिक कानूनी सलाह पर निर्भर हुए बिना नियमों का पालन करने में सक्षम बनाया जाना चाहिए।
वहीं पीएचडी चैंबर की इकोनॉमीज कमेटी के चेयरमैन आशीष विग ने आईएएनएस से कहा कि नए श्रम कोड्स को लेकर अभी भी कई उद्योगों में स्पष्टता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत इस दिशा में लगातार काम कर रहा है और इसे पूरी तरह लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी का समय मिलना चाहिए।
--आईएएनएस 

[@ सेल्फ़ी का ऎसा पागलपन देख दंग रह जाएंगे...]


[@ अरे वाह...बकरी के बच्चे के साथ योगा:देखें PIX]


[@ ये है "भूतिया" जंगल,जान देने आते है लोग]