RBI का रेपो रेट 5.50 प्रतिशत करना बाज़ार अनुमानों के अनुकूल ; अब बैंकों का फोकस NIM बचाने पर रहेगा: एंजेल वन
Source : business.khaskhabar.com | Oct 07, 2026 | 

बिजनेस डेस्क। मुंबई भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% करने का निर्णय बाज़ार की व्यापक अपेक्षाओं के पूरी तरह अनुरूप रहा है। ब्रोकरेज फर्म एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान के अनुसार, केंद्रीय बैंक का यह नपा-तुला कदम कच्चे तेल की चढ़ती कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड के दबाव के बीच महंगाई को काबू में रखने के लिए समय रहते उठाया गया विवेकपूर्ण कदम है।
विश्लेषक के अनुसार, 25 बीपीएस की इस बढ़ोतरी का बाज़ार को पहले से ही अनुमान था। हालांकि, मौद्रिक रुख (stance) में 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' की ओर बदलाव यह साफ संकेत देता है कि फिलहाल निकट भविष्य में दरों में कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है। रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि तात्कालिक आर्थिक वृद्धि (ग्रोथ) की तुलना में मूल्य स्थिरता (प्राइस स्टेबिलिटी) उसकी पहली प्राथमिकता है।
शेयर बाज़ार के नजरिए से देखें तो यह बढ़ोतरी पहले से ही वैल्यूएशन में शामिल (प्राइस्ड-इन) थी। खान का मानना है कि इस पूर्व-सूचित मौद्रिक समायोजन से बाज़ार में किसी घबराहट या तेज गिरावट की आशंका नहीं है। आगे चलकर घरेलू इक्विटी बाज़ार की चाल मौद्रिक नीति के बजाय कंपनियों के वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2) के वित्तीय नतीजों और कॉर्पोरेट कैश फ्लो पर अधिक निर्भर करेगी।
इस दर वृद्धि का बैंकिंग सेक्टर की रणनीतियों पर सीधा असर देखने को मिलेगा।
जानकारों के मुताबिक, बैंकों का विश्लेषणात्मक ध्यान अब आक्रामक लोन विस्तार (क्रेडिट एक्सपेंशन) से हटकर अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) की रक्षा करने पर आ गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जमा दरों में संशोधन (डिपॉजिट रिप्राइसिंग) की गति अब तेज होगी, जिससे बैंकों की फंड लागत बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बैंक का यह नपा-तुला फैसला ब्याज दर-संवेदनशील क्षेत्रों (रियल एस्टेट, ऑटो, बैंकिंग) में बिना किसी गिरावट की घबराहट पैदा किए, संस्थागत निवेशकों को मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता के प्रति आश्वस्त करता है।
[@ इस मंदिर में लक्ष्मी माता के आठ रूप]
[@ कुंडली का ये भाव बताता है आप ‘अमीर’ है या ‘गरीब’]
[@ क्या अब भी रेखा की मांग में है संजय दत्त के नाम का सिंदूर?]