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पीयूष गोयल ने कारोबारियों से 2030 तक भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की अपील की

Source : business.khaskhabar.com | Oct 13, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 piyush goyal urges businesses to double india uk bilateral trade by 2030 852619नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को भारत और ब्रिटेन के कारोबारियों से भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) से पैदा हुए अवसरों को व्यापार, निवेश, साझेदारी और रोजगार सृजन बढ़ाने में बदलने की अपील की। 
भारत-ब्रिटेन संयुक्त आर्थिक एवं व्यापार समिति (जेटको) के 16वें सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों को 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य रखना चाहिए और भारत-ब्रिटेन विजन 2035 को अधिक आर्थिक महत्वाकांक्षा और सहयोग का आधार बनाना चाहिए।
गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके तहत ब्रिटेन के बाजार में अधिकांश भारतीय निर्यात को शून्य शुल्क पर पहुंच मिलेगी, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटेन के निर्यातकों के लिए भी बड़े अवसर खुलेंगे। इस समझौते से सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा हुए हैं। 
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पर दोहरे अंशदान से बचाव संबंधी समझौता प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सेवाओं की आपूर्ति और मुनाफे में सुधार के जरिये दोनों अर्थव्यवस्थाओं को और फायदा पहुंचा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार बढ़ाने, निर्यात के नए अवसर विकसित करने और आपस में कारोबार किए जाने वाले उत्पादों की विविधता बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं।
मौजूदा व्यापारिक पूरकताओं का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत स्मार्टफोन, फार्मास्युटिकल उत्पादों, आभूषणों, कपड़ों, चमड़े के सामान, चावल और कुछ कृषि उत्पादों, लौह एवं गैर-मिश्रधातु इस्पात, मशीनरी के पुर्जों तथा ऑटोमोबाइल कलपुर्जों का प्रमुख निर्यातक है। वहीं, ब्रिटेन की ओर से पेट्रोलियम मूल्य शृंखला के विभिन्न उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं विद्युत उपकरणों से जुड़े प्रौद्योगिकी उत्पादों, औषधियों, मोटर कारों और स्कॉच व्हिस्की की आपूर्ति में संभावनाएं हैं।
भारत-ब्रिटेन सहयोग के लिए पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की रूपरेखा पेश करते हुए गोयल ने कहा कि बुनियादी ढांचे और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में परियोजनाओं के विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली पारेषण लाइनों और उपयोगिता क्षेत्र के वित्तपोषण में अवसर उपलब्ध हैं। इससे दोनों देशों में सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।
दूसरा प्राथमिकता वाला क्षेत्र उन्नत विनिर्माण और मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं हैं, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सटीक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि सहयोग से प्रतिस्पर्धी विनिर्माण तंत्र विकसित करने, आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने और दोनों विश्वसनीय साझेदारों के बीच भरोसा बढ़ाने में मदद मिलनी चाहिए।
तीसरी प्राथमिकता प्रौद्योगिकी और नवाचार है। उन्होंने शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और स्टार्टअप के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास में अधिक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
चौथा क्षेत्र वित्तीय सेवाओं का है। गोयल ने गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी और लंदन के वित्तीय केंद्र के बीच अधिक सहयोग की जरूरत बताई। उन्होंने फिनटेक, बीमा, सीमा पार भुगतान, ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्तपोषण और व्यापार वित्तपोषण को सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि दोनों वित्तीय केंद्रों को अधिक प्रगति और समृद्धि के लिए एक-दूसरे से जुड़े मार्ग के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए।
पांचवां क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा और उपभोक्ता क्षेत्र है। गोयल ने भारत की ओर से जेनेरिक दवाओं और ब्रिटेन की ओर से ब्रांडेड एवं इनोवेटिव दवा उत्पादों के क्षेत्र में अवसरों को रेखांकित किया। इसके अलावा, उन्होंने निदान सेवाओं, खाद्य प्रसंस्करण और उपभोक्ता वस्तुओं में भी सहयोग की संभावनाएं बताईं।
सत्र को संबोधित करते हुए ब्रिटेन के व्यापार, नवाचार, विज्ञान एवं व्यापार राज्य सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा कि सीईटीए पर सहमति बनना दोनों देशों की सरकारों और कारोबारियों के बीच निरंतर एवं व्यावहारिक संवाद की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि सीईटीए को लागू हुए लगभग 100 दिन हो चुके हैं और उत्साहजनक संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के कारोबारी इस समझौते का लाभ उठाना शुरू कर रहे हैं। वे उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, जीवन विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सेवाओं और रचनात्मक उद्योगों में नए अवसर तलाश रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कारोबारी इसका इस्तेमाल निर्यात, निवेश और साझेदारी बढ़ाने के लिए किस तरह करते हैं।
--आईएएनएस

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